PREVIEW — internal stakeholder review only · not for public circulation

हमारे बारे में · हमारी कहानी और सीईओ का संदेश

स्वस्थ मिट्टी। स्वस्थ भोजन। स्वस्थ लोग।

भूमिसेवा — मिट्टी और स्वास्थ्य का पोषण — हरित क्रांति 2.0, यानी स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ लोग आंदोलन का नेतृत्व करती है। हम किसान के पहले एकड़ को परिवार की थाली से जोड़ते हैं, ताकि स्वस्थ मिट्टी किसान के लिए बेहतर आमदनी और हर घर के लिए अवशेष-मुक्त भोजन बने।

3साल सतह के नीचे निर्माण
12राज्यों में किसानों के साथ काम
15+इकोसिस्टम भागीदार

हमारी कहानी

भूमिसेवा अब तक बड़े पैमाने पर क्यों नहीं दिखी।

कई लोगों ने सोचा कि भूमिसेवा बड़े पैमाने पर क्यों नहीं दिखी। मिट्टी को चुपचाप समृद्ध करने वाले केंचुए की तरह, हमने तीन साल उसके नीचे काम किया।

भूमिसेवा सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ने बेहतरीन विशेषज्ञ, सिद्ध तकनीकें और प्रतिष्ठित संस्थाएँ एक साथ लाईं, और जो पहले से मौजूद है उसे दोबारा बनाने के बजाय भारत की अग्रणी संस्थाओं को एक मिट्टी-से-बाज़ार इकोसिस्टम में जोड़ा।

आज वे जड़ें लगभग पूरी हो चुकी हैं। अगला चरण शुरू हो गया है: हमारे भागीदारों के बहुमत स्वामित्व वाली ज़िला और राज्य भागीदार कंपनियाँ, इस मॉडल को एक ज़िले से अगले ज़िले तक ले जा रही हैं।

  1. स्वस्थ मिट्टी
  2. स्वस्थ भोजन
  3. स्वस्थ किसान
  4. स्वस्थ परिवार
  5. स्वस्थ लोग

“हम भोजन की कीमतें नहीं बढ़ाते। हम स्रोत पर ही अतिरिक्त मूल्य बनाकर और अनुशासन से उसकी रक्षा करके किसान की आय बढ़ाते हैं।”

मिलिंद देशपांडे · सीईओ, भूमिसेवा

हमारे सीईओ का संदेश

आसान गलत के बजाय कठिन सही चुनो।

प्रिय भूमिसेवा परिवार,

आपसे भूमिसेवा CEO के रूप में नहीं, बल्कि इस यात्रा में आपके साथ चल रहे एक साथी के रूप में कुछ मन की बात कहना चाहता हूँ।

ज़िंदगी ने मुझे एक बात बहुत अच्छी तरह सिखाई है — जो काम वास्तव में बड़ा और सार्थक होता है, उसका रास्ता कभी आसान नहीं होता। आसान रास्ते हमेशा मिल जाते हैं। कभी थोड़ा समझौता कर लेना, कभी सच को अनदेखा कर देना, कभी किसी कठिन निर्णय को कल पर टाल देना, और कभी परिस्थितियों के सामने चुप हो जाना।

लेकिन हमारी राह अलग है। हाल ही में मैंने एक वाक्य पढ़ा, जो मेरे मन में गहराई से उतर गया —

मन में बसे शब्द“आसान गलत रास्ते के बजाय कठिन सही रास्ता चुनो। और जहाँ रीढ़ की हड्डी होनी चाहिए, वहाँ केवल इच्छाओं की हड्डी मत बढ़ने दो।”

मुझे लगता है, यही भावना हमारी हरित क्रांति 2.0 की आत्मा होनी चाहिए।

हमारा सपना बड़ा है। इसलिए रास्ता भी बड़ा है। इस रास्ते पर कठिन दिन आएँगे। कभी परिणाम हमारी अपेक्षा के अनुसार नहीं होंगे। कभी कोई निर्णय कठिन लगेगा। कभी शायद हमें खुद से भी सवाल पूछना पड़ेगा।

लेकिन ऐसे हर क्षण में हमें एक बात याद रखनी है — हम आसान रास्ता चुनने के लिए नहीं निकले हैं। हम सही रास्ता बनाने के लिए निकले हैं।

क्योंकि हम केवल एक कंपनी नहीं बना रहे हैं। हम मिट्टी के साथ भारत का रिश्ता फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। हम केवल किसान की उपज बढ़ाने की बात नहीं कर रहे — हम उसकी मिट्टी को स्वस्थ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मिट्टी स्वस्थ होगी, तो अन्न स्वस्थ होगा। अन्न स्वस्थ होगा, तो इंसान स्वस्थ होगा। और इंसान स्वस्थ होगा, तो भारत स्वस्थ और मजबूत होगा।

मेरे लिए भूमिसेवा केवल एक कंपनी नहीं है। यह मेरे जीवन के अनुभवों से जन्मी एक जिम्मेदारी है। और आज उस जिम्मेदारी की यात्रा में आप सभी मेरे साथ हैं — यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

इसलिए —

  1. गलती दिखाई दे तो उसे कहने का साहस रखिए।
  2. जिम्मेदारी मिले तो उससे पीछे मत हटिए।
  3. समस्या आए तो दोष देने से पहले समाधान खोजिए — और सपना बड़ा लगे तो उससे डरिए मत।

केवल इच्छा मत कीजिए — अपनी रीढ़ मजबूत कीजिए। केवल सपना मत देखिए — उसे साकार करने की जिम्मेदारी उठाइए।

हो सकता है कि आज हमें अपनी यात्रा की पूरी मंज़िल दिखाई न दे। लेकिन एक दिन पीछे मुड़कर देखते हुए मैं यह कह सकूँ — "हमने परिस्थितियों का इंतज़ार नहीं किया। हमने परिस्थितियों को बदलने का साहस किया।" तो चलिए... मिलकर हरित क्रांति 2.0 को केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता बनाते हैं जिसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखें।

मुझे आप सभी पर पूरा विश्वास है।

आपका,मिलिंद देशपांडेमुख्य कार्यकारी अधिकारी, भूमिसेवा

तीन शब्दों में लक्ष्य

स्वस्थ मिट्टी → स्वस्थ लोग → स्वस्थ भारत

मिलकर, हम बदलाव लाते हैं।

भूमिसाथी, भूमिसेवा का डिजिटल सहायक

हम मार्गदर्शन करते हैं। किसान उगाता है। परिवार पहले से बुक करता है।

व्हॉट्सऐप पर भूमिसाथी से पूछें, या अपना नज़दीकी केंद्र खोजें — शुरुआत पहले मिट्टी परीक्षण से होती है।