हमारे सीईओ का संदेश
आसान गलत के बजाय कठिन सही चुनो।
प्रिय भूमिसेवा परिवार,
आपसे भूमिसेवा CEO के रूप में नहीं, बल्कि इस यात्रा में आपके साथ चल रहे एक साथी के रूप में कुछ मन की बात कहना चाहता हूँ।
ज़िंदगी ने मुझे एक बात बहुत अच्छी तरह सिखाई है — जो काम वास्तव में बड़ा और सार्थक होता है, उसका रास्ता कभी आसान नहीं होता। आसान रास्ते हमेशा मिल जाते हैं। कभी थोड़ा समझौता कर लेना, कभी सच को अनदेखा कर देना, कभी किसी कठिन निर्णय को कल पर टाल देना, और कभी परिस्थितियों के सामने चुप हो जाना।
लेकिन हमारी राह अलग है। हाल ही में मैंने एक वाक्य पढ़ा, जो मेरे मन में गहराई से उतर गया —
मन में बसे शब्द“आसान गलत रास्ते के बजाय कठिन सही रास्ता चुनो। और जहाँ रीढ़ की हड्डी होनी चाहिए, वहाँ केवल इच्छाओं की हड्डी मत बढ़ने दो।”
मुझे लगता है, यही भावना हमारी हरित क्रांति 2.0 की आत्मा होनी चाहिए।
हमारा सपना बड़ा है। इसलिए रास्ता भी बड़ा है। इस रास्ते पर कठिन दिन आएँगे। कभी परिणाम हमारी अपेक्षा के अनुसार नहीं होंगे। कभी कोई निर्णय कठिन लगेगा। कभी शायद हमें खुद से भी सवाल पूछना पड़ेगा।
लेकिन ऐसे हर क्षण में हमें एक बात याद रखनी है — हम आसान रास्ता चुनने के लिए नहीं निकले हैं। हम सही रास्ता बनाने के लिए निकले हैं।
क्योंकि हम केवल एक कंपनी नहीं बना रहे हैं। हम मिट्टी के साथ भारत का रिश्ता फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। हम केवल किसान की उपज बढ़ाने की बात नहीं कर रहे — हम उसकी मिट्टी को स्वस्थ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मिट्टी स्वस्थ होगी, तो अन्न स्वस्थ होगा। अन्न स्वस्थ होगा, तो इंसान स्वस्थ होगा। और इंसान स्वस्थ होगा, तो भारत स्वस्थ और मजबूत होगा।
मेरे लिए भूमिसेवा केवल एक कंपनी नहीं है। यह मेरे जीवन के अनुभवों से जन्मी एक जिम्मेदारी है। और आज उस जिम्मेदारी की यात्रा में आप सभी मेरे साथ हैं — यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
इसलिए —
- गलती दिखाई दे तो उसे कहने का साहस रखिए।
- जिम्मेदारी मिले तो उससे पीछे मत हटिए।
- समस्या आए तो दोष देने से पहले समाधान खोजिए — और सपना बड़ा लगे तो उससे डरिए मत।
केवल इच्छा मत कीजिए — अपनी रीढ़ मजबूत कीजिए। केवल सपना मत देखिए — उसे साकार करने की जिम्मेदारी उठाइए।
हो सकता है कि आज हमें अपनी यात्रा की पूरी मंज़िल दिखाई न दे। लेकिन एक दिन पीछे मुड़कर देखते हुए मैं यह कह सकूँ — "हमने परिस्थितियों का इंतज़ार नहीं किया। हमने परिस्थितियों को बदलने का साहस किया।" तो चलिए... मिलकर हरित क्रांति 2.0 को केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता बनाते हैं जिसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखें।
मुझे आप सभी पर पूरा विश्वास है।
आपका,मिलिंद देशपांडेमुख्य कार्यकारी अधिकारी, भूमिसेवा
